CHAPTER 2 – काँच सा एहसास
CHAPTER 2 – अनदेखे रास्तों की शुरुआत अलीज़ा ने डायरी बंद करके मेज़ पर रख दी। उसका अपना मन फिर से भारी हो गया था। वह खिड़की के पास गई और पर्दा थोड़ा सरकाया। बाहर धूप फैल चुकी थी, लेकिन उसके अंदर एक अजीब-सी ठंडक थी— जैसे दिल अपना ही मौसम बना लेता है। नीचे से नादिया की आवाज़ आई— “दीदी, मैं स्कूल जा रही हूँ!” अलीज़ा ने नीचे झुककर कहा, “ख़याल रखना, ठीक से पढ़ाई करना!” नादिया मुस्कुरा कर चली गई, लेकिन अलीज़ा की नज़र उसके पीछे दूर तक टिकी रही— शायद इसलिए कि अपने अंदर चल रही उथल-पुथल से ध्यान बँट जाए। पुरानी तस्वीरें अलीज़ा ने अलमारी दुबारा खोली। इस बार उसने डायरी नहीं, बल्कि एक पुरानी फाइल निकाली। उस फाइल में उसकी कॉलेज की तस्वीरें थीं— हँसती हुई, खुश, बेफिक्र अलीज़ा की। एक तस्वीर पर उसकी नज़र अटक गई। उसमें वह मुस्कुरा रही थी… और उसके साथ एक साया भी था। चेहरा साफ नहीं दिख रहा था, लेकिन उस साये को पहचानने के लिए चेहरे की ज़रूरत नहीं थी। वो वही था… जिसके एहसास ने उसे बदला भी, और तोड़ा भी। उसका दिल ज़रा-सा काँपा— जैसे किसी ने अचानक कोई दरवाज़ा खोल दिया हो जिसे वह बंद रखना चाहती थी। --- दिल...